काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री वालेन्द्र (बालेन) शाह के संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में दिए संबोधन को अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने अलग-अलग नजरिए से प्रमुखता दी है। शाह ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़-पहिरो, जलवायु परिवर्तन, जलवायु न्याय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मुद्दा उठाया था।
ब्रिटेन के द गार्डियन, कतर के अलजजीरा, जर्मनी के डॉयचे वेले और फ्रांस 24 ने शाह के संबोधन को मुख्य रूप से नेपाल की बाढ़ और जलवायु संकट से जोड़कर रिपोर्ट किया।
 गार्डियन ने शाह के इस बयान को प्रमुखता दी कि नेपाल में आई बाढ़ ‘विश्व के लिए चेतावनी’ है। शाह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन में नेपाल का योगदान एक प्रतिशत के दसवें हिस्से से भी कम है, फिर भी उसे इसके गंभीर दुष्परिणाम झेलने पड़ रहे हैं।
रॉयटर्स ने बाढ़ के बाद नेपाल के पुनर्निर्माण के लिए ऋण के बजाय अनुदान आधारित अंतरराष्ट्रीय सहायता की शाह की मांग को प्रमुखता दी। अलजजीरा ने नेपाल की ओर से लॉस एंड डैमेज फंड से 2 करोड़ डॉलर की सहायता मांगने और जलवायु आपदा से बढ़ते जोखिम का उल्लेख किया।
भारतीय मीडिया ने शाह के संबोधन में भारत और चीन के साथ प्रस्तावित ‘हिमालय जलवायु उत्थानशीलता तंत्र’ को विशेष महत्व दिया। हिंदुस्तान टाइम्स और अन्य भारतीय मीडिया संस्थानों ने उपग्रह आंकड़ों के आदान-प्रदान, हिमतालों की निगरानी, पूर्व चेतावनी प्रणाली और सीमापार आपदा प्रबंधन में सहयोग के प्रस्ताव को प्रमुखता से प्रकाशित किया।
अमेरिकी द न्यूयॉर्क टाइम्स ने हालांकि शाह के भाषण की तुलना में उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व और काले चश्मे को केंद्र में रखा। अखबार ने इसे शाह की सार्वजनिक पहचान का हिस्सा बताया।
चीन के प्रमुख मीडिया संस्थानों में शाह के भाषण को लेकर अलग से उतनी प्रमुख कवरेज नहीं दिखी। हालांकि नेपाल में बाढ़ के बाद चीन के राहत और बचाव प्रयासों को वहां के मीडिया ने रिपोर्ट किया था।
इस तरह अंतरराष्ट्रीय कवरेज में शाह के भाषण के तीन प्रमुख पक्ष उभरे—जलवायु संकट, जलवायु न्याय और क्षेत्रीय सहयोग।
Image: Nepal Journal