नई दिल्ली। दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR ने आम मतदाताओं के साथ कई चर्चित नामों के चुनावी रिकॉर्ड को भी सत्यापन के दायरे में ला दिया है। पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, सांसद बांसुरी स्वराज और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल समेत अनेक प्रमुख लोगों को रिकॉर्ड में विसंगति या पिछली SIR सूची से मैपिंग नहीं होने के कारण नोटिस जारी किए गए हैं।
दिल्ली में करीब 97 लाख मतदाताओं वाले ड्राफ्ट रोल में से लगभग 33.13 लाख मतदाताओं को उनके गणना फॉर्म अथवा पुराने रिकॉर्ड से जुड़े विवरण में विसंगतियों के आधार पर नोटिस के लिए चिह्नित किया गया है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि ये नोटिस प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें मतदाता का नाम काटने का आदेश नहीं माना जा सकता।
पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, उनकी बेटी प्रतिभा और बहू गीतिका के नाम पिछली SIR सूची से मैप नहीं होने वाले मामलों में सामने आए हैं। उनके बेटे जयंत आडवाणी का रिकॉर्ड मैप होने की जानकारी है।विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको जयशंकर का नाम भी ऐसे मामलों में बताया गया है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का नाम भी नोटिस पाने वाले प्रमुख मतदाताओं में है।
पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम 'अनमैप्ड' श्रेणी में सामने आया। पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और उनके परिवार के सदस्यों के रिकॉर्ड में भी अलग-अलग तरह की विसंगतियां बताई गईं।मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मामले में उनके द्वारा दिए गए विवरण में उम्र संबंधी विसंगति सामने आई थी। हालांकि दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनके रिकॉर्ड को वैध ठहराते हुए अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए मंजूर कर लिया गया।
SIR की प्रक्रिया में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, CBI निदेशक प्रवीण सूद, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, SEBI अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे, नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया और पूर्व दिल्ली उपराज्यपाल नजीब जंग जैसे नाम भी सामने आए हैं। चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू का रिकॉर्ड भी सत्यापन सूची में आया था।
SIR के दौरान दिवंगत अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय का नाम मतदाता रिकॉर्ड में पाए जाने से भी सवाल उठा। देबरॉय का नवंबर 2024 में निधन हो चुका था। रिपोर्टों के अनुसार उनका नाम दिल्ली कैंट विधानसभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र के रिकॉर्ड में दर्ज मिला। अधिकारियों ने कहा कि ऐसे मामलों को अंतिम सूची तैयार करने से पहले दुरुस्त किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने भी 'मैकेनिकल' नोटिस पर पूछा सवालl
SIR को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। 23 सितंबर को सुनवाई के दौरान अदालत ने 33 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि नोटिस कुछ मामलों में 'मैकेनिकल' प्रतीत होते हैं और चुनाव आयोग से पूछा कि क्या इन्हें जारी करने से पहले अतिरिक्त फिल्टर की जरूरत है। अदालत ने आयोग से स्थिति रिपोर्ट भी मांगी।
आयोग की सफाई—नोटिस का अर्थ नाम कटना नहीं
चुनाव आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि SIR नोटिस मिलने का अर्थ मतदाता सूची से नाम हटना नहीं है। जिन मतदाताओं को नोटिस मिला है, उन्हें संबंधित दस्तावेज और स्पष्टीकरण देने का अवसर है। किसी पात्र मतदाता का नाम हटाने से पहले सुनवाई और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।दिल्ली CEO के अनुसार दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। ऐसे में फिलहाल इन चर्चित नामों को 'वोटर सूची से बाहर' कहना सही नहीं होगा। SIR का अंतिम परिणाम ही बताएगा कि इनमें से कितने मामले महज रिकॉर्ड या डेटा-मिलान की विसंगतियां थीं और किन मामलों में वास्तविक संशोधन की जरूरत पड़ी।