पूर्व प्रधानन्यायाधीश जबरा को तड़के घर से ले गई पुलिस, ‘सुरक्षा चुनौती’ के दावे पर उठे सवाल :नेपाल
तड़के तीन बजे पूर्व प्रधानन्यायाधीश जबरा के घर पहुंची पुलिस, ‘सुरक्षा चुनौती’ बताकर ले गई साथ, कुछ घंटे बाद गिरफ्तारी की खबर से मचा हड़कंप, पुलिस ने कहा—शिकायत मिली है;
काठमांडू। नेपाल के पूर्व प्रधानन्यायाधीश चोलेन्द्रशमशेर जबरा को रविवार तड़के करीब तीन बजे उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालय की टीम उनके आवास से अपने साथ ले गई। पुलिस ने उस समय सुरक्षा चुनौती का हवाला दिया, जबकि बाद में अधिकारियों ने उनके खिलाफ शिकायत मिलने की बात कही। हालांकि शिकायत की प्रकृति और कार्रवाई का कानूनी आधार सार्वजनिक नहीं किया गया है। घटनाक्रम को लेकर पूर्व न्यायाधीशों और पूर्व पुलिस अधिकारियों ने भी सवाल उठाए हैं।पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, रविवार तड़के जब पुलिस टीम जबरा के आवास पर पहुंची, तब परिवार के सभी सदस्य सो रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जबरा की सुरक्षा को खतरा है और उन्हें पुलिस के साथ चलना होगा। जबरा ने घर पर ही अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात करने का आग्रह किया, लेकिन अधिकारियों ने कार्यालय चलकर बातचीत करने की बात कही। इसके बाद उन्हें पुलिस कार्यालय ले जाया गया।परिवार के एक सदस्य के अनुसार, उस समय न तो कोई गिरफ्तारी वारंट दिखाया गया और न ही किसी आरोप की जानकारी दी गई। कुछ घंटे बाद जबरा को गिरफ्तार किए जाने की खबरें सामने आने लगीं। इसके बाद परिवार ने पुलिस की कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।उपत्यका अपराध अनुसन्धान कार्यालय के एसपी रामेश्वर कार्की ने सुबह जबरा को कार्यालय लाए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें सुरक्षा चुनौती के कारण सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जबरा के खिलाफ तत्काल कोई मुकदमा चलाने की बात नहीं है और उन्हें छोड़ा जाएगा। हालांकि सुरक्षा चुनौती किससे या किस कारण से थी, इसका उन्होंने खुलासा नहीं किया।पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जबरा के आवास पर टीम ऊपर के स्तर से मिले निर्देश के बाद पहुंची थी। बाद में उनके पुराने मामलों से जुड़े पहलुओं की भी जानकारी जुटाई गई। अधिकारियों के मुताबिक, उस समय उनके खिलाफ तत्काल हिरासत में रखने योग्य किसी नए मामले की स्पष्ट जानकारी नहीं थी।कार्रवाई के समय और तरीके पर पूर्व प्रधानन्यायाधीश ओमप्रकाश मिश्र ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सुरक्षा चुनौती थी तो उनके आवास पर अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकती थी। पूर्व न्यायाधीश बलराम केसी ने भी रात तीन बजे कार्रवाई की जरूरत पर सवाल उठाया।पूर्व सीआईबी प्रमुख हेमंत मल्ल ठकुरी ने कहा कि किसी व्यक्ति को नियंत्रित करने की कार्रवाई में प्रक्रिया और कारण स्पष्ट होना चाहिए। उनके अनुसार केवल सुरक्षा चुनौती का हवाला देकर किसी को रातभर पुलिस कार्यालय में रखना सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जाना चाहिए।चोलेन्द्रशमशेर जबरा नेपाल के 29वें प्रधानन्यायाधीश रहे। उनके खिलाफ 1 फरवरी 2022 को महाभियोग प्रस्ताव दायर हुआ था और वे निलंबित रहे। बाद में नवंबर 2022 में उन्होंने सेवानिवृत्ति ली। हाल में सर्वोच्च अदालत की संवैधानिक इजलास ने उनके खिलाफ महाभियोग से जुड़े रिट खारिज करते हुए मामले की औचित्य समाप्त होने की बात कही थी।ऐसे में इसके कुछ ही समय बाद तड़के पुलिस द्वारा उन्हें आवास से ले जाने की घटना ने नेपाल में पुलिस कार्रवाई, सुरक्षा व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया को लेकर बहस छेड़ दी है।
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