बढ़नी/सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा से सटे ढेबरुआ थाना क्षेत्र में नशीले पदार्थों की कथित उपलब्धता को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। स्मैक, चरस और नशीली दवाओं के इस्तेमाल को लेकर मिल रही शिकायतों के बीच नवागत थाना प्रभारी के सामने क्षेत्र में नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की चुनौती है।
नवागत थाना प्रभारी इससे पहले जिले में एसओजी प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनके अनुभव को देखते हुए स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यदि क्षेत्र में नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री या तस्करी से संबंधित गतिविधियां हो रही हैं तो पुलिस उनकी जांच कर प्रभावी कार्रवाई करेगी।
कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना क्षेत्र के कुछ हिस्सों में नशे के सेवन को लेकर स्थिति चिंताजनक दिखाई देती है। उनका दावा है कि युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ने की आशंका है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और किसी व्यक्ति या स्थान विशेष के खिलाफ कोई आरोप प्रमाणित रूप से सामने नहीं आया है।
सीमा क्षेत्र होने के कारण ढेबरुआ थाना पुलिस के सामने नशीले पदार्थों की तस्करी पर निगरानी रखना भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों ने पुलिस अधीक्षक से क्षेत्र में नशीले पदार्थों की उपलब्धता और संभावित तस्करी की शिकायतों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई कराने की मांग की है।
अब निगाह इस बात पर है कि नवागत थाना प्रभारी अपने पूर्व अनुभव का इस्तेमाल करते हुए नशे से संबंधित शिकायतों की किस तरह जांच कराते हैं और यदि अवैध गतिविधियां सामने आती हैं तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।