इस्कॉन गुरुकुल विवाद में शिकायतों से उठे बाल सुरक्षा पर सवाल
पुलिस में मामले दर्ज; अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आठ पदाधिकारियों के निलंबन की सूचना, नेपाल शाखा ने उठाए सवाल
काठमांडू। बूढ़ानीलकंठ स्थित इस्कॉन के भक्तिवेदांत गुरुकुल से जुड़े दो मामलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। एक परिवार ने अपनी 13 वर्षीय बेटी और पांच वर्षीय बेटे से कथित दुर्व्यवहार की शिकायत की है। दोनों मामलों से संबंधित कानूनी प्रक्रिया चल रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपों पर अदालत का अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।क्या है शिकायत: परिवार का आरोप है कि 13 वर्षीय बेटी के साथ गुरुकुल में अध्ययन के दौरान एक वरिष्ठ छात्र ने कथित यौन दुर्व्यवहार किया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि पांच वर्षीय बेटे के साथ तत्कालीन प्रिंसिपल सुरजकृष्ण श्रेष्ठ ने मारपीट की और उसे कथित तौर पर पिन से चोट पहुंचाई। बालिका के मामले में आरोपित छात्र के फरार होने की बात परिवार और पुलिस से जुड़ी जानकारी में सामने आई है।क्या कार्रवाई हुई: परिवार ने पहले इस्कॉन के बाल संरक्षण कार्यालय में शिकायत किए जाने की बात कही। बाद में 17 वैशाख में जिला पुलिस परिसर, काठमांडू में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने उपलब्ध जानकारी के अनुसार बालक से कथित शारीरिक एवं मानसिक दुर्व्यवहार के मामले में तत्कालीन प्रिंसिपल श्रेष्ठ को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया। गिरफ्तारी या शिकायत अपने आप में आरोप सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।इस्कॉन की कार्रवाई: भारत स्थित इस्कॉन के बाल संरक्षण कार्यालय की ओर से जारी पत्र के अनुसार, नेपाल से जुड़े आठ पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है। पत्र में बाल संरक्षण संबंधी गंभीर शिकायतों और प्रबंधन संबंधी कथित कमियों का उल्लेख है। जांच पूरी होने तक संबंधित लोगों को प्रबंधन, प्रशासन और नेतृत्व की भूमिकाओं से अलग रखने की बात कही गई है।नेपाल शाखा का पक्ष: इस्कॉन नेपाल के अध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने कहा कि निलंबन को दोष सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, संगठन बच्चों के खिलाफ हिंसा के मामले में शून्य-सहनशीलता की नीति रखता है और कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करेगा। इस्कॉन नेपाल की साधारणसभा ने निलंबन सूचना की वैधता पर भी आपत्ति जताई है।अदालत में मामला: संबंधित मामले काठमांडू जिला अदालत में विचाराधीन बताए गए हैं। पीड़ितों, अभिभावकों और प्रमुख गवाहों के बयान की न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित है। ऐसे में आरोपों की सत्यता, जिम्मेदारी और किसी व्यक्ति की दोषिता पर अंतिम निष्कर्ष अदालत के निर्णय के बाद ही निकलेगा।
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
टिप्पणियां
टिप्पणी करने के लिए रीडर लॉगिन करें।