वाराणसी में इन दिनों सेवा का मौसम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर काशी से वडनगर तक ऐसी यात्रा निकली कि बाइकें 250, यात्री 500 और कलश में नदियों का पानी भी हजारों किलोमीटर की यात्रा पर निकल पड़ा। यानी सेवा संकल्प ऐसा कि पेट्रोल का हिसाब छोड़िए, अब गंगा-यमुना भी यात्रा में शामिल हैं।सिगरा के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत जनप्रतिनिधियों ने बाइक यात्रा को हरी झंडी दिखाई। अब काशी से वडनगर तक रास्ते में सेवा भी होगी और संदेश भी।सबसे दिलचस्प मामला कलश यात्रा का है। गंगा, यमुना, नर्मदा, गोमती, राप्ती, सरयू, अलकनंदा, वरुणा समेत कई नदियों का जल कलशों में भरकर वडनगर ले जाया जा रहा है। काशी से दस यात्राएं अलग-अलग रास्तों से निकल चुकी हैं। वहां भगवान हाटकेश्वर को जल चढ़ाया जाएगा। जवाब में वडनगर से भी नदियों का पानी काशी आएगा और बाबा विश्वनाथ को अर्पित किया जाएगा।अब इसे सेवा कहिए, श्रद्धा कहिए या राजनीतिक आयोजन का धार्मिक संस्करण—आयोजकों के पास हर सवाल का अपना जवाब है। भक्तिभाव इतना कि नदियां भी इस यात्रा में वीआईपी बन गईं।यात्रा में झारखंड से 17 लोगों का दल भी शामिल है। प्रदीप मुखर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर मिलना उनके लिए गौरव की बात है। कानपुर के रजत मिश्रा ने भी बताया कि उन्होंने अपनी इच्छा से यात्रा के लिए आवेदन किया।यानी मामला साफ है—जिसे बाइक चलानी आती है, वह सेवा यात्री; जिसे कलश संभालना आता है, वह जल यात्री। और जिसे दोनों काम आते हैं, उसके लिए काशी से वडनगर तक पूरा पैकेज तैयार है।वैसे ‘सेवा संकल्प अभियान’ का असली संदेश भी इसी में छिपा है—जन्मदिन अब केवल केक काटने का कार्यक्रम नहीं रहा। कहीं सफाई अभियान है, कहीं जनसंपर्क, कहीं बाइक यात्रा और कहीं नदियों का जल। राजनीति में जन्मदिन भी अब आयोजन प्रबंधन की परीक्षा बन चुका है।काशी से वडनगर की यह यात्रा धार्मिक प्रतीकों, जनसंपर्क और सेवा कार्यक्रमों को एक साथ लेकर चल रही है। फर्क बस इतना है कि पहले तीर्थयात्री भगवान तक पहुंचने के लिए निकलते थे, अब कलश भी यात्रा पर निकलते हैं और साथ में कैमरे भी।