नेपाल के कोसी प्रान्त के। जनपद के बेलका नगरपालिका-4 के आहाले में शुक्रवार रात में पहाड़ दरकने के बाद ऐसी तबाही मची कि ग्रामीणों को जान बचाने के लिए घर छोड़कर जंगल की ओर भागना पड़ा।
तीन घर पूरी तरह पहिरो में बह गए, जबकि जमीन में गहरी दरारें पड़ने से 'नौ अन्य मकान रहने लायक नहीं बचे। बेघर हुए नौ परिवार अब पड़ोसी चम्पाकोट गांव में दूसरे लोगों के घरों में शरण लिए हुए हैं।स्थानीय लोगों के मुताबिक रात करीब सात बजे पहाड़ खिसकना शुरू हुआ। लगातार तेज बारिश के बीच लोगों को घरों से सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला। बर्तन, कपड़े और जरूरी सामान जंगल में बिखरा पड़ा है। कई परिवारों के बकरियां, मुर्गियां और मवेशी भी अब तक सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंच सके हैं। 55 वर्षीय रहरमान राई शनिवार सुबह परिवार के संपर्क में आए। घटना के बाद वह गहरे सदमे में हैं।वडाध्यक्ष जयकुमार राई के अनुसार पांच किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में जमीन फट गई है। खेत और जंगल भी जगह-जगह चिर गए हैं। मैनामैनी-मचुङटार और आहालेडांडा की सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। लगातार बारिश के कारण राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है।पहिरो से बच्चों की पढ़ाई भी ठप हो गई है। स्कूल जाने का रास्ता बह गया है और उनकी किताब-कापियां क्षतिग्रस्त घरों में ही रह गई हैं।आहालेडांडा बेलका का प्रमुख पर्यटन क्षेत्र है, जहां व्यावसायिक पैराग्लाइडिंग का टेकऑफ स्थल भी था। पहिरो से पर्यटन गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं।उपमेयर जिरा राई ने जमीन में बड़े पैमाने पर दरारें पड़ने की घटना को गंभीर बताते हुए भूगर्भविदों से अध्ययन कराने की जरूरत बताई है। प्रभावित परिवारों ने सुरक्षित स्थान पर तत्काल पुनर्वास की मांग की है।/
पहाड़ फटा, घर बह गए; जंगल में रात काट रहे नौ परिवार :नेपाल
शुक्रवार रात में पहाड़ दरकने के बाद ऐसी तबाही मची कि ग्रामीणों को जान बचाने के लिए घर छोड़कर जंगल की ओर भागना पड़ा।
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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