लखनऊ/सिद्धार्थनगर। ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था के विरोध और सेवा संबंधी मांगों को लेकर प्रदेशभर के पंचायत सहायकों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। सात सितंबर से लखनऊ के ईको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे पंचायत सहायकों ने मांगें पूरी होने तक ऑनलाइन उपस्थिति के साथ पंचायत से जुड़े ऑनलाइन-ऑफलाइन कार्यों का बहिष्कार जारी रखने का निर्णय लिया है।पंचायत सहायक संघ ने शासन से पांच सूत्रीय मांगों पर तत्काल आदेश जारी करने और आंदोलन के दौरान किसी भी पंचायत सहायक के खिलाफ प्रतिकूल कार्रवाई नहीं करने की मांग की है।30 हजार मानदेय की मांगसंघ ने पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ाकर 30 हजार रुपये प्रतिमाह करने, संविदा व्यवस्था समाप्त कर स्थायी सेवा नियमावली लागू करने और राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग की है। महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व अवकाश, स्थानांतरण-समायोजन नीति तथा आगामी ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में 50 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की मांग भी रखी गई है। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड अथवा बीमा योजना का लाभ देने की मांग की गई है।ऑनलाइन हाजिरी पर सवालसंघ का मुख्य विरोध ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर है। उसका कहना है कि पंचायत सचिवालयों में पंचायत सचिव, सफाई कर्मी, शौचालय केयर टेकर और पंचायत सहायक समेत कई कर्मियों के लिए ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू है। इसके बावजूद उपस्थिति को लेकर नोटिस अथवा कार्रवाई का दबाव मुख्य रूप से पंचायत सहायकों पर बनाया जा रहा है। संघ ने सवाल उठाया है कि व्यवस्था समान है तो कार्रवाई की नीति भी समान क्यों नहीं है।फेसियल रिकॉग्निशन से उपस्थितिपंचायत राज विभाग के निदेशक ने जून 2026 में पंचायत सचिवालयों में फेसियल रिकॉग्निशन आधारित उपस्थिति लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए डेस्कटॉप, इंटरनेट और वेबकैम को क्रियाशील रखने तथा डैशबोर्ड से प्रतिदिन उपस्थिति की निगरानी के निर्देश हैं। बिना पूर्व सूचना या स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित रहने अथवा फेस स्कैन नहीं करने पर कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।संघ का कहना है कि मांगों पर शासनादेश जारी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, विभागीय स्तर पर उपस्थिति व्यवस्था लागू कराने और पंचायत सचिवालयों का कामकाज सुचारु रखने की जिम्मेदारी है। ऐसे में अब निगाह शासन की वार्ता और अगले निर्णय पर है।