लखनऊ, 10 सितंबर। उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही धनराशि के निर्धारित उपयोग की निगरानी में अभिभावकों की भूमिका बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही विद्यालय और विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर दिया गया है।डीबीटी से प्राप्त धनराशि का उपयोग केवल स्कूल ड्रेस, जूता-मोजा, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी की खरीद में किया जाना है। अभिभावकों को सामग्री की गुणवत्ता और उपयोगिता पर ध्यान देने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए जागरूक किया जाएगा कि बच्चे उसका नियमित उपयोग करें। सामग्री के रखरखाव और सुरक्षित संरक्षण के लिए भी अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को प्रेरित किया जाएगा।महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विकासखंड और विद्यालय स्तर पर अभिभावकों को डीबीटी राशि के निर्धारित उपयोग की जानकारी दी जाए और प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। प्रधानाध्यापक और शिक्षक अभिभावकों से संवाद कर सामग्री की उपलब्धता और उसके उपयोग की स्थिति की जानकारी लेंगे।विद्यालय निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों को उपलब्ध सामग्री का कक्षावार और विद्यार्थीवार सत्यापन किया जाएगा। खंड शिक्षा अधिकारी और जिला स्तरीय अधिकारी यह भी देखेंगे कि निर्धारित सामग्री खरीदी गई है और विद्यार्थी उसका उपयोग कर रहे हैं।विभाग ने स्पष्ट किया है कि डीबीटी राशि का उपयोग निर्धारित सामग्री के अलावा किसी अन्य प्रयोजन में नहीं किया जा सकता। सामग्री की खरीद नहीं होने अथवा राशि के अन्य उपयोग की शिकायत मिलने पर संबंधित अभिभावकों से संपर्क कर आवश्यक परामर्श दिया जाएगा।जनपद स्तर पर प्राप्त शिकायतों और फीडबैक का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था में अभिभावकों को निगरानी की महत्वपूर्ण कड़ी बनाते हुए विद्यालय, खंड और जिला स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराना और सरकारी सहायता का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाना है।
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