उत्तर प्रदेश में गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
25 सूत्रीय एजेंडे पर विचार-विमर्श, बायोगैस और जैविक उत्पादों के माध्यम से आय बढ़ाने की पहल
लखनऊ, 10 सितंबर। उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के साथ गोशालाओं को आत्मनिर्भरता के मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (UPCAR) के संयुक्त सहयोग से कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में 25 सूत्रीय एजेंडे पर बैठक आयोजित की गई।पिकअप भवन में हुई बैठक में गोशालाओं को प्राकृतिक खेती, जैविक उर्वरक, बायोगैस, पंचगव्य आधारित उत्पादों और ग्रामीण रोजगार से जोड़ने के विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा की गई। गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत किसानों और पशुपालकों को दिए जाने वाले गोवंश की अधिकतम संख्या चार से बढ़ाकर 10 करने का सुझाव दिया।आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल ने गोशालाओं के प्रबंधन और गोवंश की देखभाल में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने घायल गोवंश को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 24×7 समर्पित एंबुलेंस सेवा शुरू करने का प्रस्ताव रखा।बैठक में गोशालाओं में मृत गोवंश के निर्धारित मानकों के अनुरूप व्यवस्थित एवं सम्मानजनक निस्तारण तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने पर भी विचार किया गया।गोशालाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए गोबर और गोमूत्र से जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत, जैविक खाद तथा अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने और उनके विपणन की व्यवस्था पर चर्चा हुई। बड़े गो संरक्षण केंद्रों और अस्थायी गो आश्रय स्थलों में बायोगैस संयंत्र स्थापित करने तथा किसानों के यहां पक्के कैटल शेड, यूरिन टैंक और नाद निर्माण के प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल रहे।कृषि उत्पादन आयुक्त ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आयोग के सुझावों पर प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। यूपीसीएआर के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने भी बैठक में अपने विचार रखे
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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