सिद्धार्थनगर। जिले के गांवों में बच्चों और माताओं तक पोषण सेवाएं पहुंचाने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों को इस बार सिर्फ सरकारी योजना के क्रियान्वयन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही के केंद्र के रूप में मजबूत करने की तैयारी है। आज बुद्धवार से शुरू हो रहे 9वें राष्ट्रीय पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है। अभियान में बच्चों के पोषण के साथ भोजन की गुणवत्ता, प्रारंभिक बाल विकास और गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं तक योजनाओं की पहुंच पर विशेष जोर रहेगा।पूर्वांचल के ग्रामीण जिलों में आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों और महिलाओं के लिए पोषण तथा प्रारंभिक देखभाल की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में पोषण माह की गतिविधियों का असर तभी दिखाई देगा, जब अभियान कागजी आयोजनों से आगे बढ़कर गांव के स्तर पर नियमित निगरानी और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं में बदले।
बच्चों की थाली पर रहेगी नजरअभियान के तहत आहार विविधता और पर्याप्त प्रोटीन को प्राथमिकता दी जाएगी। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बाजरा जैसे मोटे अनाज, दाल, मौसमी सब्जियां, फल, दूध, नट्स और बीज जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों के इस्तेमाल के प्रति परिवारों को जागरूक किया जाएगा।आंगनवाड़ी केंद्रों पर मिलने वाले गर्म पके भोजन की गुणवत्ता और विविधता पर भी जोर रहेगा। भोजन की स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा को लेकर परीक्षण तथा सामुदायिक भोजन-चखने जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इससे यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास होगा कि बच्चों के लिए निर्धारित पोषण केवल रजिस्टरों में दर्ज न हो, बल्कि उनकी थाली में भी दिखाई दे।
मेन्यू बोर्ड से बढ़ेगी पारदर्शिताआंगनवाड़ी केंद्रों पर पूरक पोषण कार्यक्रम (SNP) का मेन्यू बोर्ड प्रदर्शित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य लाभार्थियों और अभिभावकों को मिलने वाले भोजन की जानकारी उपलब्ध कराना तथा स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाना है।
इसके साथ आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों (AMC) की भूमिका को भी मजबूत किया जाएगा। पोषण माह के दौरान प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्र पर कम से कम एक समिति बैठक आयोजित करने का लक्ष्य है। समितियां सेवा वितरण और केंद्र की गतिविधियों की निगरानी में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने का माध्यम बनेंगी।
पोषण के साथ बच्चे के विकास पर भी नजरअभियान में छह वर्ष तक के बच्चों के पोषण के साथ उनके शारीरिक, मानसिक और संज्ञानात्मक विकास को भी प्राथमिकता दी गई है। विशेष रूप से जीवन के शुरुआती वर्षों में पोषण, देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा के महत्व को लेकर परिवारों को जागरूक किया जाएगा। बच्चों के विकासात्मक पड़ावों की निगरानी तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर जोर रहेगा।
वहीं प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर पात्र गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तक योजना का लाभ पहुंचाने और पंजीकरण बढ़ाने के लिए भी अभियान चलाया जाएगा।
जिले में असली चुनौती क्रियान्वयन कीसिद्धार्थनगर जैसे ग्रामीण बहुल जिले में पोषण माह की सफलता का पैमाना आयोजित कार्यक्रमों की संख्या नहीं, बल्कि आंगनवाड़ी केंद्रों पर भोजन की गुणवत्ता, बच्चों की नियमित उपस्थिति, माताओं की भागीदारी और सेवाओं की वास्तविक उपलब्धता होगी।
सरकारी स्तर पर अभियान की गतिविधियां तय हैं, लेकिन अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जिले के आंगनवाड़ी केंद्रों पर इन दिशा-निर्देशों का कितना प्रभावी पालन होता है। यदि ग्राम पंचायत, अभिभावक और आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियां सक्रिय भूमिका निभाती हैं तो पोषण माह महज एक अभियान न रहकर गांव के बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और भविष्य की स्थायी पहल बन सकता है।
सिद्धार्थनगर में आंगनवाड़ी केंद्रों की अब होगी सामुदायिक निगरानी
‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम के साथ 9वां राष्ट्रीय पोषण माह आज से—बच्चों की थाली से मातृ स्वास्थ्य तक गुणवत्ता पर जोर
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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