नई दिल्ली। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि डॉक्टरों पर हमला करने वाले राजनीतिक नेताओं को खुलेआम घूमने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर आरोपियों को हिरासत में लेने की बात अदालत ने कही।महाराष्ट्र के कल्याण स्थित शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट के मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी सामने आई। मामले में शिवसेना के नगरसेवक रमेश म्हात्रे पर डॉक्टरों के साथ मारपीट का आरोप है। उनकी जमानत से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अस्पताल में हिंसा को गंभीर विषय माना।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक पद या प्रभाव किसी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं बनाता। अस्पतालों में डॉक्टर मरीजों की जान बचाने के लिए काम करते हैं। ऐसे में उनके साथ मारपीट से न केवल चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों के बीच भय का माहौल भी पैदा होता है।महाराष्ट्र सरकार ने आरोपी की जमानत रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अदालत ने मामले में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की है।शीर्ष अदालत की सख्त टिप्पणी का संदेश साफ है—जनप्रतिनिधि होना कानून से छूट का अधिकार नहीं देता। अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी है। स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष एवं कठोर कानूनी कार्रवाई जरूरी है।