सिद्धार्थनगर/इटवा। इटवा ब्लॉक में तैनात एक सफाई कर्मी के निलंबन और उसके बाद हुई विभागीय कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि 25 फरवरी 2026 को एक निजी व्यक्ति की शिकायत के आधार पर कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद करीब पांच माह तक विभागीय जांच आगे नहीं बढ़ी। अब आरोप-पत्र जारी होने के बाद उसकी प्रक्रिया और उसमें दर्ज तथ्यों को लेकर भी आपत्ति जताई जा रही है।
परिजनों के मुताबिक निलंबन से पहले ग्राम प्रधान या ग्रामीणों के बयान नहीं लिए गए और शिकायत के समर्थन में ऑडियो-वीडियो जैसे साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं कराए गए। उनका आरोप है कि केवल एक शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई। करीब 160 दिन बाद जारी आरोप-पत्र में कर्मचारी पर तहसील परिसर में गाली-गलौज करने का आरोप लगाया गया है। इस पर परिजन सवाल कर रहे हैं कि यदि घटना तहसील परिसर में हुई थी तो सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अथवा अन्य साक्ष्य जांच में क्यों नहीं शामिल किए गए।
आरोप-पत्र में दर्ज तारीख को लेकर भी सवाल उठे हैं। परिजनों का कहना है कि पत्र पर 28 जुलाई की टाइपिंग तिथि है, जबकि हस्ताक्षर 5 अगस्त को किए गए। उन्होंने दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया और तिथियों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
लंबे समय से निलंबित रहने के कारण कर्मचारी के परिवार के सामने आर्थिक संकट पैदा होने का दावा किया गया है। परिजनों ने कर्मचारी को तत्काल बहाल करने, नियमानुसार लंबित वित्तीय देयकों का भुगतान करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि न्याय नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री पोर्टल, पंचायती राज विभाग के उच्चाधिकारियों और मानवाधिकार आयोग में शिकायत की जाएगी।
हालांकि, प्रकरण में पंचायती राज विभाग के अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आ सका है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।