नोट बंदी के बाद भी फेक करेंसी की चर्चा गरम
सहारनपुर से नेपाल और फिर सिद्धार्थनगर तक उठते सवाल, सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक के करेंसी चेस्ट में करीब 17.29 करोड़ रुपये की नकली करेंसी, और नेपाल के रूपन्देही में भारतीय जाली नोटों के साथ दो छात्रों की गिरफ्तारी मिलने की खबर ने बैंकिंग व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक के करेंसी चेस्ट में करीब 17.29 करोड़ रुपये की नकली करेंसी मिलने की खबर ने बैंकिंग व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।इसी बीच नेपाल के रूपन्देही में भारतीय जाली नोटों के साथ दो छात्रों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि दोनों छात्र सहारनपुर में बीएएमएस की पढ़ाई कर रहे थे और इनमें से एक सिद्धार्थनगर का रहने वाला है।अब सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या सहारनपुर की घटना और नेपाल में हुई गिरफ्तारी के बीच कोई संबंध है?फिलहाल इसका कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए किसी व्यक्ति या घटना को दूसरी घटना से जोड़कर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।लेकिन जांच के लिए सवाल कई हैं।नकली नोट करेंसी चेस्ट तक पहुंचे कैसे? उनका स्रोत क्या था? बैंकिंग रिकॉर्ड क्या बताते हैं? नेपाल में गिरफ्तार छात्रों की गतिविधियों, संपर्कों और वित्तीय लेन-देन से क्या कोई प्रमाणित कड़ी सामने आती है?सिद्धार्थनगर का वर्ष 2008 का डुमरियागंज एसबीआइ करेंसी चेस्ट मामला भी इन घटनाओं के बीच फिर चर्चा में है। उस समय भी बड़ी मात्रा में नकली मुद्रा बरामद हुई थी और मामले की जांच सीबीआइ ने की थी। हालांकि पुराने मामले को वर्तमान घटना से जोड़ने के लिए भी ठोस प्रमाण जरूरी होंगे। मामले में एनआइए की जांच से उम्मीद है कि वास्तविक तथ्य सामने आएंगे।सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन फैसला जांच और सबूतों को ही करने देना चाहिए।क्योंकि संदेह खबर हो सकता है, लेकिन सत्य नहीं—और अंतिम निष्कर्ष केवल प्रमाण से निकलना चाहिए।Image credit: AI
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