बढ़नी, सिद्धार्थनगर। सरकारी दफ्तरों में फाइलों की रफ्तार को लेकर आम लोगों की शिकायतें नई नहीं हैं, लेकिन जब मामला पत्रकारों से जुड़े सरकारी विज्ञापन का हो और प्रक्रिया कई दिनों तक लंबित रहे, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। बढ़नी ब्लॉक में अगस्त माह के विज्ञापन की प्रक्रिया 11 अगस्त से शुरू होने के बावजूद 1 सितंबर तक पूरी नहीं होने पर क्षेत्र के पत्रकारों में नाराजगी दिखाई दे रही है।
पत्रकारों का कहना है कि विज्ञापन संबंधी प्रक्रिया के लिए आवश्यक कार्रवाई 11 अगस्त से शुरू हुई थी। इसके बाद समय बीतता गया और देखते-देखते अगस्त समाप्त होकर सितंबर भी आ गया, लेकिन प्रक्रिया अपने अंतिम मुकाम तक नहीं पहुंच सकी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस देरी की वजह क्या है?
पत्रकारों के बीच चर्चा है कि क्या मामले में कोई तकनीकी अथवा प्रशासनिक अड़चन है? क्या किसी स्तर पर फाइल लंबित है? या फिर जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं ले रहे हैं? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
व्यंग्यात्मक अंदाज में कुछ पत्रकारों का कहना है कि कहीं बढ़नी ब्लॉक में ‘टालू टेक्नोलॉजी’ तो सक्रिय नहीं है, जिसमें आज का काम कल और कल का काम अगली तारीख पर टलता चला जाए। हालांकि, पत्रकारों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी पर व्यक्तिगत आरोप लगाना नहीं, बल्कि प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित कराना है।
पत्रकारों का कहना है कि सरकारी विज्ञापन किसी व्यक्ति विशेष पर एहसान नहीं, बल्कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत होने वाली कार्रवाई है। इसलिए इसमें पारदर्शिता, समानता और समयबद्धता जरूरी है। व्यक्तिगत संपर्क अथवा कथित चाटुकारिता के आधार पर लाभ मिलने की चर्चाएं व्यवस्था के लिए उचित संदेश नहीं देतीं।
मामले ने एक व्यापक सवाल भी खड़ा कर दिया है—जब विज्ञापन की एक प्रक्रिया को पूरा होने में इतना समय लग सकता है, तो गांवों में विकास योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों की फाइलें कितनी तेजी से आगे बढ़ती होंगी?
हालांकि, इन सवालों के बीच संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना भी जरूरी है। यदि देरी के पीछे कोई प्रशासनिक, तकनीकी या दस्तावेज संबंधी कारण है तो उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि पत्रकारों और आम लोगों के बीच किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
बीडीओ का पक्ष
इस संबंध में बढ़नी के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
क्षेत्र के पत्रकारों ने मांग की है कि मामले की स्थिति स्पष्ट करते हुए लंबित प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कराया जाए तथा भविष्य में ऐसी प्रक्रियाओं के लिए समयबद्ध और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अब देखना यह है कि अगस्त का अटका विज्ञापन सितंबर में रास्ता पाता है या ‘टालू टेक्नोलॉजी’ का सफर आगे भी जारी रहता है।
अगस्त का विज्ञापन अटका, सितंबर आ गया—बढ़नी ब्लॉक की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
11 अगस्त से शुरू हुई प्रक्रिया 1 सितंबर तक पूरी नहीं होने पर पत्रकारों में नाराजगी, बीडीओ से स्थिति स्पष्ट करने की मांग
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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