सिद्धार्थ नगर। बढनी क्षेत्र में इन दिनों जगह-जगह खुल रहे पैथोलॉजी सेंटरों को लेकर स्थानीय लोगों के बीच चर्चाएं तेज हो गई हैं। चौराहे से लेकर गलियों और बाजार के आसपास दिखाई देने वाले इन सेंटरों के संचालन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इनके पंजीकरण, संचालकों की योग्यता और जांच की निर्धारित प्रक्रिया की निगरानी कौन कर रहा है?स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में पैथोलॉजी सेंटरों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने यह जांच करना जरूरी है कि कौन-कौन से सेंटर नियमानुसार पंजीकृत हैं और किन केंद्रों पर निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है।यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि बिना आधिकारिक जांच के किसी भी पैथोलॉजी सेंटर को अवैध अथवा नियमविरुद्ध कहना उचित नहीं होगा। लेकिन जब स्थानीय स्तर पर शिकायतें और सवाल सामने आ रहे हों तो संबंधित विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि वह जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखे।मरीज की जिंदगी से बड़ा कुछ नहींपैथोलॉजी रिपोर्ट किसी मरीज के इलाज का महत्वपूर्ण आधार होती है। डॉक्टर कई बार जांच रिपोर्ट के आधार पर ही बीमारी की पहचान और उपचार की दिशा तय करते हैं। ऐसे में यदि जांच की प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्था या रिपोर्ट की गुणवत्ता में कोई कमी हो तो इसका सीधा असर मरीज के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।इसीलिए स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से मांग की है कि बढनी बाजार क्षेत्र में संचालित सभी पैथोलॉजी सेंटरों की पंजीकरण स्थिति, संचालकों की योग्यता, तकनीकी संसाधन, जांच प्रक्रिया और रिपोर्ट की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए।अब सवाल स्वास्थ्य विभाग सेआखिर बढनी बाजार में कितने पैथोलॉजी सेंटर पंजीकृत हैं?कितने सेंटर निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित हो रहे हैं?क्या विभाग ने समय-समय पर इनकी जांच की है?और यदि जांच नहीं हुई तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है?जनता किसी सेंटर को बंद कराने की मांग नहीं कर रही, बल्कि नियमों के अनुसार जांच और पारदर्शिता चाहती है।अब देखना यह है कि स्थानीय नागरिकों की शिकायत और उठते सवालों पर स्वास्थ्य विभाग कब सक्रिय होता है। जांच होगी तो तस्वीर साफ होगी—कौन नियमों के साथ है और कौन सवालों के घेरे में।फ्रस्ट क्लिप न्यूज़ चैनल की नजर इस पूरे मामले पर बनी रहेगी।