इटवा। सिद्धार्थनगर : इटवा थाना क्षेत्र में तैनात रहे कुछ पुलिस एवं एलआईयू कर्मियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सोशल मीडिया पर कथित घूसखोरी से संबंधित वीडियो वायरल होने और स्थानीय व्यापारियों की ओर से उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज है। हालांकि वायरल वीडियो तथा आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि एलआईयू कर्मी आकाश चौरसिया तथा इटवा थाने से संबद्ध रहे विपुल राय और नरेंद्र देव चौहान का स्थानांतरण पुलिस लाइन किया गया है। इसके बावजूद उनके इटवा थाना क्षेत्र और आसपास दिखाई देने की चर्चाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्थानांतरण आदेश प्रभावी हो चुका है, तो पुराने कार्यक्षेत्र में उनकी मौजूदगी का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए।
कुछ व्यापारियों और नागरिकों की ओर से आरोप लगाए गए हैं कि पूर्व में अनावश्यक दबाव बनाया जाता था तथा कार्रवाई या वीडियो वायरल करने की धमकी दी जाती थी। कुछ लोगों ने फर्जी मुकदमे में फंसाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों की सत्यता जांच का विषय है।
स्थानीय लोगों ने पुलिस अधिकारियों से वायरल वीडियो, शिकायतों और स्थानांतरण आदेशों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई हो और यदि आरोप निराधार हैं तो विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट की जाए।
अब निगाहें पुलिस अधीक्षक एवं संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
नोट: समाचार में उल्लिखित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच के बाद ही निर्धारित होगा।
स्थानांतरण के बाद भी इटवा में सक्रियता पर सवाल, वायरल वीडियो से बढ़ी हलचल
इटवा थाना क्षेत्र में तैनात रहे कुछ पुलिस एवं एलआईयू कर्मियों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
टिप्पणियां
टिप्पणी करने के लिए रीडर लॉगिन करें।