बढ़नी सिद्धार्थनगर। जनपद में फैले अंग्रेजी माध्यम के पब्लिक स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर कुछ अभिभावकों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान उनकी शैक्षणिक योग्यता, विषयगत दक्षता और शिक्षण क्षमता का पर्याप्त सत्यापन नहीं किया जा रहा है। कुछ अभिभावकों ने दावा किया है कि विद्यालय में ऐसे शिक्षक भी कार्यरत हैं, जिन्हें अंग्रेजी भाषा में अपेक्षित स्तर पर संवाद करने में कठिनाई होती है और उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल हैं।अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में निजी विद्यालयों में दाखिला कराते हैं और इसके लिए अपनी मेहनत की कमाई से नियमित रूप से फीस का भुगतान करते हैं। उनका उद्देश्य केवल बच्चों को विद्यालय भेजना नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर वातावरण और योग्य शिक्षकों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराना होता है। ऐसे में यदि शिक्षक ही निर्धारित शैक्षणिक मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं तो इसका सीधा प्रभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ सकता है।अभिभावकों ने यह भी कहा कि विद्यालयों की जिम्मेदारी केवल भवन, ड्रेस, स्मार्ट क्लास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
 शिक्षा की वास्तविक गुणवत्ता शिक्षक की योग्यता, विषय की समझ, पढ़ाने के तरीके और विद्यार्थियों के साथ संवाद करने की क्षमता से तय होती है। इसलिए विद्यालय प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक विषय को पढ़ाने के लिए पर्याप्त योग्यता और प्रशिक्षण रखने वाले शिक्षक ही नियुक्त किए जाएं।मामले को लेकर अभिभावकों ने संबंधित शिक्षा विभाग और सक्षम अधिकारियों से विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यालय में कार्यरत सभी शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, प्रशिक्षण प्रमाणपत्र, अनुभव और नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाना चाहिए। साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि विद्यालय में निर्धारित शैक्षणिक मानकों और संबंधित विभाग के नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा किसी भी बच्चे के भविष्य की नींव होती है। इस क्षेत्र में लापरवाही का असर तत्काल दिखाई नहीं देता, लेकिन लंबे समय में विद्यार्थियों की क्षमता और उनके भविष्य के अवसरों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग दोनों को विद्यार्थियों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।हालांकि, विद्यालय के संबंध में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। विद्यालय प्रबंधन का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा। यदि प्रबंधन के पास शिक्षकों की योग्यता और नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं तो उन्हें जांच के दौरान प्रस्तुत कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।अभिभावकों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराएं और जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। विद्यालय मे कार्यरत शिक्षको काना म पता उन की योग्यता आदि वोर्डपर दर्ज हो ना चाहिएउनका कहना है कि विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। बच्चों का भविष्य किसी भी संस्था की लापरवाही, अनदेखी या केवल व्यावसायिक हितों की कीमत पर दांव पर नहीं लगाया जा सकता।