लखनऊ, 20 अगस्त। उत्तर प्रदेश में सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार की जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) प्रभावी साबित हो रही है। चालू वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से 9 अगस्त तक प्रदेश में 7,17,736 संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए हैं, जिससे मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिली है।
स्वास्थ्य सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने वाली महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में 1,400 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य महिलाओं को घर पर प्रसव के बजाय अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है।
योजना के अंतर्गत 9 अगस्त तक 5,43,661 लाभार्थियों को भुगतान किया जा चुका है। हाथरस, मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर, बागपत, जौनपुर, अम्बेडकरनगर और सोनभद्र जैसे जिलों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जहां 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों को भुगतान मिल चुका है।
केजीएमयू की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल के अनुसार संस्थागत प्रसव से प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं का समय पर उपचार संभव होता है। इससे मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी आती है। योजना को सफल बनाने में आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के फील्ड कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
हालांकि सिद्धार्थनगर, बहराइच और अलीगढ़ में भुगतान की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है, जिसके सुधार के निर्देश दिए गए हैं।