काठमांडू। उच्च अदालत पाटन ने जनआस्था प्रकाशन प्रालिका अध्यक्ष तथा सम्पादक किशोर श्रेष्ठ को तत्काल गिरफ्तार या हिरासत में लेने पर रोक लगा दी है। मामला जनआस्था साप्ताहिक प्रकाशित एक समाचार को लेकर दर्ज शिकायत से जुड़ा है। समाचार में २०८३ साउन २७ गते ‘सुध्रिनोस म्याडम, अझै समय छ’ शीर्षक से सामग्री प्रकाशित की गई थी। इस समाचार को लेकर प्रेस काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत पर कार्रवाई जारी रहने के दौरान गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए श्रेष्ठ ने उच्च अदालत में निषेधाज्ञा की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना कि संबंधित समाचार को लेकर प्रेस काउंसिल में शिकायत पहले से विचाराधीन है और उस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अदालत ने संविधान में सुनिश्चित विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा संचार के अधिकार के साथ ही सर्वोच्च अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों का भी उल्लेख किया।
उच्च अदालत ने जिला प्रहरी परिसर, ललितपुर को श्रेष्ठ की याचिका पर लिखित जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया है। साथ ही मामले का अंतिम फैसला होने तक उन्हें गिरफ्तार करने, हिरासत में लेने अथवा थुनामा राख्नेलगायतका कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है।
अदालत के इस आदेश को प्रेस काउंसिल में शिकायत की प्रक्रिया पूरी होने से पहले समाचार के आधार पर पत्रकार के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई पर न्यायिक रोक के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, मामले की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।