काठमांडू। जनआस्था के संपादक किशोर श्रेष्ठ को दोबारा गिरफ्तार करने की पुलिस की कोशिश को जिला अदालत ललितपुर ने झटका दिया है। अदालत ने पर्याप्त कागजात और प्रमाण नहीं होने का हवाला देते हुए श्रेष्ठ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने से इनकार कर दिया।
जानकारी के मुताबिक, उपसभामुख रूबीकुमारी ठाकुर की ओर से जनआस्था में प्रकाशित एक तस्वीर को लेकर ललितपुर में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस मंगलवार को श्रेष्ठ को गिरफ्तार करने की अनुमति लेने जिला अदालत पहुंची थी। हालांकि अदालत ने आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण पूरे नहीं होने के कारण पुलिस की मांग स्वीकार नहीं की।गौरतलब है कि श्रेष्ठ को सोमवार को ही सर्वोच्च अदालत के आदेश के बाद रिहा किया गया था। सर्वोच्च अदालत के आदेश के अगले ही दिन पुलिस द्वारा एक अन्य शिकायत के आधार पर उन्हें फिर गिरफ्तार करने का प्रयास किए जाने से मामला चर्चा में आ गया है।इधर, दोबारा गिरफ्तारी की तैयारी की जानकारी मिलने के बाद पत्रकार किशोर श्रेष्ठ ने मंगलवार को ही उच्च अदालत पाटन में निषेधाज्ञा की याचिका दायर की है। इसी याचिका पर सुनवाई चल रही थी, उसी दौरान पुलिस गिरफ्तारी वारंट के लिए जिला अदालत पहुंची।इससे पहले सर्वोच्च अदालत की न्यायमूर्ति नकुल सुवेदी और बालकृष्ण ढकाल की संयुक्त इजलास ने समाचार से जुड़े मामले में चल रही पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए श्रेष्ठ को हाजिर जमानी पर रिहा करने का आदेश दिया था। अब अदालत द्वारा वारंट जारी करने से इनकार किए जाने के बाद मामले ने प्रेस स्वतंत्रता और पत्रकारों के कानूनी अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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