नवजीवन हॉस्पिटल में प्रसव के बाद महिला की मौत, बिना पंजीकरण अस्पताल चलने के आरोप से मचा हड़कंप
नवजीवन हॉस्पिटल में प्रसव के बाद महिला की मौत, बिना पंजीकरण अस्पताल चलने के आरोप से मचा हड़कंप I ‘नॉर्मल डिलीवरी’ का भरोसा, फिर ऑपरेशन और हालत बिगड़ने पर रेफर—गोरखपुर ले जाते समय महिला ने तोड़ा दम
सिद्धार्थनगर / उत्तर प्रदेश : सिद्धार्थनगर के खेसरहा क्षेत्र के बेलौहा में नवजीवन हॉस्पिटल में प्रसव के बाद 25 वर्षीय महिला की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही, ऑपरेशन और इलाज के नाम पर आर्थिक शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, अस्पताल के पंजीकरण को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।मृतका रिंका के पति मनीष अग्रहरि के अनुसार, वह अपनी पत्नी को प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खेसराहा लेकर पहुंचे थे। वहां से बेहतर इलाज की सलाह मिलने के बाद वे रिंका को बेलौहा स्थित नवजीवन हॉस्पिटल ले गए।परिजनों का कहना है कि अस्पताल में जांच के बाद उन्हें सामान्य प्रसव होने का भरोसा दिया गया। आरोप है कि कुछ समय बाद महिला के पेट पर दबाव बनाया गया, जिससे वह दर्द से परेशान हो गई। इसके बाद अचानक ऑपरेशन कर दिया गया।परिजनों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद रिंका की हालत तेजी से बिगड़ गई। उसके मुंह से झाग निकलने लगा। अस्पताल की ओर से दो यूनिट रक्त की व्यवस्था करने को कहा गया। रक्त उपलब्ध कराने के बावजूद महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ।इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने उसे गोरखपुर रेफर कर दिया। परिजनों के अनुसार अस्पताल की गाड़ी से गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में ही रिंका की मौत हो गई।महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और शव लेकर रात में नवजीवन हॉस्पिटल पहुंच गए। वहां हंगामे की सूचना पर पुलिस पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। परिजनों ने अस्पताल पर इलाज के नाम पर लगातार पैसे लेने का भी आरोप लगाया है।अस्पताल के पंजीकरण पर बड़ा सवालमामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। नैदानिक स्थापना के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल के अनुसार, नवजीवन हॉस्पिटल का पंजीकरण नहीं होने की बात सामने आई है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो सवाल यह है कि बिना पंजीकरण अस्पताल में प्रसव और ऑपरेशन जैसी सेवाएं कैसे संचालित हो रही थीं।अस्पताल के बाहर अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और अन्य जांच सुविधाओं से संबंधित बोर्ड लगे होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में इन सभी सुविधाओं की वैधता और संचालन की अनुमति की जांच जरूरी हो गई है।जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासनमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय दोहरे ने कहा है कि मामले की जांच कराई जाएगी। आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि ऑपरेशन किसने किया, उसकी चिकित्सकीय योग्यता क्या थी, अस्पताल में कौन-कौन चिकित्सक मौजूद थे और महिला की मौत की वास्तविक वजह क्या थी।फ्रस्ट क्लिप की नजर में बड़ा सवाल यही है—अगर अस्पताल का पंजीकरण नहीं था, तो वहां मरीजों का इलाज और ऑपरेशन किसकी अनुमति से चल रहा था?मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगा।
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
टिप्पणियां
टिप्पणी करने के लिए रीडर लॉगिन करें।