मान्यता कक्षा 8 तक, दसवीं तक चल रही कक्षाएं—स्कूल प्रबंधन पर उठे सवाल
आरोप है कि विद्यालय को कक्षा 8 तक की मान्यता प्राप्त है, जबकि परिसर में कक्षा 10 तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।
सिद्धार्थनगर। जिले के विकास क्षेत्र बढ़नी अंतर्गत भुतहिया (मटियार उर्फ भुतहवा) गांव स्थित एक व्यक्तिगत जूनियर हाई स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विद्यालय को कक्षा 8 तक की मान्यता प्राप्त है, जबकि परिसर में कक्षा 10 तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह शिक्षा व्यवस्था के निर्धारित मानकों और विभागीय निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।विभागीय निगरानी पर भी सवालमामले का सबसे अहम पहलू यह है कि यदि विद्यालय की मान्यता कक्षा 8 तक है और वहां कक्षा 10 तक पढ़ाई कराए जाने का आरोप है, तो विभागीय निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई? विद्यालयों की मान्यता, कक्षाओं के संचालन, शिक्षक व्यवस्था और शैक्षणिक मानकों की जांच की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की है। ऐसे में लंबे समय से कथित रूप से उच्च कक्षाओं के संचालन की बात सामने आना निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।बेसिक शिक्षा अधिकारी, सिद्धार्थनगर की ओर से मामले की जांच का आश्वासन दिए जाने के बाद अब अभिभावकों और स्थानीय लोगों की नजर विभागीय कार्रवाई पर टिकी है। जांच में विद्यालय की वास्तविक मान्यता, संचालित कक्षाओं, छात्र संख्या, शिक्षकों की योग्यता एवं उपलब्धता, भवन तथा अन्य शैक्षणिक मानकों की स्थिति की निष्पक्ष पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।कागज और जमीन की हकीकत में अंतर तो जिम्मेदार कौन?शिक्षा के क्षेत्र में मान्यता महज कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य और उनकी शैक्षणिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है। इसलिए केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए तथा सामने आए तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय में नियमों की अनदेखी कर उच्च कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है और पर्याप्त योग्य शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल हैं। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की जांच पर है। यह जांच तय करेगी कि विद्यालय में मान्यता के अनुरूप ही कक्षाएं संचालित हो रही हैं या नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि कागजों पर कक्षा 8 तक सीमित मान्यता और जमीन पर कक्षा 10 तक संचालन के आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि अनियमितता मिलती है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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