काठमांडू। नेपाल में भोटेकोशी बाढ़ के बाद तबाही की भयावह तस्वीर लगातार सामने आ रही है। बाढ़ के बाद अब तक 675 शव बरामद किए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 20 शवों की पहचान हो पाई है। बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं होने और अस्पतालों के शवगृह भर जाने के बाद सरकार ने अब अज्ञात और लावारिस शवों को वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत जमीन में दफनाना शुरू कर दिया है।
शवों की बढ़ती संख्या के कारण अस्पतालों और अस्थायी शव केंद्रों में जगह की भारी कमी हो गई है। कई शवों के खराब होने और संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए नेपाल सरकार ने ‘पहचान नभएका तथा बेवारिसे शव व्यवस्थापन (पहिलो संशोधन) निर्देशिका, 2083’ लागू की है।
211 शव टुकड़ों में मिले
नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबिनारायण काफ्ले के अनुसार बाढ़ के तेज बहाव ने शवों को घटनास्थल से काफी दूर तक पहुंचा दिया है। इससे उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया है। करीब 211 शव क्षत-विक्षत अवस्था में मिले हैं।
पुलिस का कहना है कि कई शव दो से तीन दिन तक पानी और कीचड़ में दबे रहे। ऐसे में शवों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। पुलिस शवों को साफ कराने के बाद उनकी तस्वीरें ले रही है और लापता लोगों के परिजनों से मिलान की कोशिश की जा रही है।
शवों को दूसरे जिलों में भेजना पड़ा
शवगृहों में जगह खत्म होने के कारण नवलपरासी पूर्व से कई शवों को दूसरे जिलों में भेजा गया है। 41 शव पोखरा और 8 शव पाल्पा भेजे गए हैं। इसके अलावा रूपन्देही और कपिलवस्तु में भी शव भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक तरफ परिजन अपने लापता लोगों की तलाश में हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में शवों की पहचान नहीं हो पा रही है।
पहले डीएनए, फिर अंतिम संस्कार
सरकार की संशोधित निर्देशिका में स्पष्ट किया गया है कि अज्ञात शवों की पहचान के लिए हर संभव वैज्ञानिक तरीका अपनाया जाएगा। इसमें बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, फिंगरप्रिंट, आइरिस, दांतों की जांच, फोरेंसिक रेडियोलॉजी और डीएनए परीक्षण शामिल हैं।
यदि इसके बावजूद पहचान नहीं हो पाती और शव को सुरक्षित रखना संभव नहीं रहता, तो डीएनए नमूना सुरक्षित रखकर शव का अंतिम संस्कार या जमीन के नीचे वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाएगा।
भविष्य में यदि कोई परिवार किसी शव पर अपना दावा करता है, तो सुरक्षित डीएनए और अन्य वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर पहचान की जा सकेगी।
चितवन में चार शव दफनाए गए
संशोधित निर्देशिका के तहत चितवन में शनिवार से शव प्रबंधन शुरू कर दिया गया। भरतपुर महानगरपालिका-1 स्थित देवघाट के खुले स्थान पर पहले चरण में चार शवों का प्रबंधन किया गया।
रसुवा में बाढ़ आने के बाद चितवन के नदी किनारों और आसपास के इलाकों से अब तक 248 शव बरामद हुए हैं, लेकिन इनमें सिर्फ चार की पहचान हो सकी है।
चितवन में डीएनए नमूने लेने के लिए सात फोरेंसिक चिकित्सकों और सात दंत चिकित्सकों समेत करीब 40 विशेषज्ञों की टीम काम कर रही है। अस्थायी शव केंद्र में रखे शवों के डीएनए नमूने लिए जा चुके हैं।
सबसे बड़ा सवाल—अपनों की पहचान कब होगी?
नेपाल में राहत और बचाव अभियान के बीच अब सबसे भावुक सवाल यही है—इन सैकड़ों अज्ञात शवों को उनके परिवार कब पहचान पाएंगे?
प्रशासन का कहना है कि शवों का सम्मानजनक प्रबंधन प्राथमिकता है, लेकिन हर शव का डीएनए और पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि भविष्य में किसी परिवार को अपने लापता सदस्य की पहचान करने में मदद मिल सके।
भोटेकोशी की बाढ़ ने हजारों परिवारों को उजाड़ दिया है। अब शवों के ढेर के बीच अपनों की तलाश कर रहे परिवारों की उम्मीद सिर्फ एक पहचान पर टिकी है—कहीं बरामद शवों में उनका अपना भी तो नहीं।
भोटेकोशी बाढ़ की भयावह तस्वीर: 675 शव बरामद, सिर्फ 20 की पहचान : नेपाल
भोटेकोशी बाढ़ की भयावह तस्वीर: 675 शव बरामद, सिर्फ 20 की पहचान—अब डीएनए सुरक्षित रखकर दफनाए जा रहे लावारिस शव, शवगृह हुए फुल, संक्रमण का खतरा बढ़ा; सरकार ने संशोधित निर्देशिका के तहत शुरू किया शवों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन।
परमात्मा प्रसाद उपाध्याय
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