लखनऊ, 12 सितंबर। एजेंसी के मुताबिक, नबील सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ग्रुप के जरिए भारत के विभिन्न हिस्सों और विदेशों के लोगों से संपर्क में था। आरोप है कि वह युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने और उन्हें हिंसक गतिविधियों के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहा था। क्या मिलानबील के मोबाइल की जांच में ‘ला गालिब-इलल्लाह’ नाम का व्हाट्सऐप ग्रुप सामने आया। एटीएस के अनुसार, कथित बातचीत में ‘जेहाद’, ‘चाकू’, ‘केमिकल’ और ‘प्लान’ के लिए क्रमशः ‘ट्रिप’, ‘पेन’, ‘जूस’ और ‘प्रोजेक्ट’ जैसे कोडवर्ड इस्तेमाल किए गए। जांच में आतंकी विचारधारा से जुड़ी पुस्तकों की सामग्री साझा किए जाने की बात भी सामने आई है।क्या थी तैयारीएटीएस का दावा है कि नबील जम्मू-कश्मीर समेत देश के दूसरे हिस्सों के लोगों को ऑनलाइन नेटवर्क से जोड़ रहा था। ‘फ्लेम्स ऑफ वॉर’ ग्रुप में बांग्लादेश, म्यांमार और सऊदी अरब के लोगों के जुड़े होने की जानकारी भी जांच में सामने आई। एजेंसी पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश में कथित प्रशिक्षण की योजना तथा हिंसक गतिविधियों से जुड़े संपर्कों की पड़ताल कर रही है।अब जांच किस दिशा मेंएटीएस डिजिटल चैट, मोबाइल डेटा और ऑनलाइन समूहों के सदस्यों की भूमिका खंगाल रही है। बम बनाने संबंधी वीडियो और रासायनिक पदार्थ से जुड़ी जानकारी साझा किए जाने के दावों की भी जांच हो रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि नबील के संपर्क में कितने लोग थे और कथित नेटवर्क की वास्तविक पहुंच कितनी थी। अन्य संदिग्धों की भूमिका सामने आने पर आगे कार्रवाई की जा सकती है।सावधानी: उपरोक्त आरोप एटीएस की जांच और दावों पर आधारित हैं; इनकी अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी