परबतसर राजस्थान। चुनाव लड़ने का जोश था, पार्टी का टिकट जेब में था और उम्मीद थी कि जनता का आशीर्वाद वोटों के रूप में बरसेगा। मगर चुनावी किस्मत ने ऐसा पेंच लगाया कि उम्मीदवार साहब अपना वोट तक नहीं डाल पाए!
मामला परबतसर नगरपालिका के वार्ड संख्या-13 का है। राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध नतीजों के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी कैलाशचंद को कुल एक वोट मिला।
अब असली मजेदार बात सुनिए। कैलाशचंद का नाम वार्ड संख्या-12 की मतदाता सूची में दर्ज है, जबकि पार्टी ने उन्हें वार्ड संख्या-13 से मैदान में उतार दिया। यानी टिकट ने कहा—“वार्ड 13 जाओ”, लेकिन वोटर लिस्ट बोली—“भाई, आपका ठिकाना तो वार्ड 12 ही है!”
नतीजा यह हुआ कि जिस चुनाव में प्रत्याशी खुद अपने पक्ष में वोट डालना चाहते थे, वहां उन्हें अपना ही वोट पराया मिल गया। कैलाशचंद ने पीटीआई को बताया कि वार्ड-13 में उन्हें मिला एकमात्र वोट किसी अन्य मतदाता का है।
गांव-देहात की भाषा में कहें तो मामला कुछ यूं रहा—“लड़ाई अपने नाम की, लेकिन वोट डालने की बारी आई तो अपना ही नाम दूसरे मोहल्ले में मिल गया!”
अब एक वोट पर भी सवाल बड़ा है—वोट देने वाला कौन था? यह राज भले न खुला हो, लेकिन इतना जरूर है कि वार्ड-13 में किसी एक मतदाता ने कैलाशचंद का साथ आखिर तक नहीं छोड़ा।
चुनावी नतीजा भले एक वोट पर अटक गया हो, मगर किस्सा ऐसा बना कि पार्टी का टिकट वार्ड-13 का और उम्मीदवार का अपना वोट वार्ड-12 का—चुनाव ने हिसाब ऐसा मिलाया कि कैलकुलेटर भी शर्मा जाए!